BPSC Gujarat Model Update: नमस्कार साथियों आज हम बात करेंगे बिहार लोक सेवा आयोग में पहली बार लागू हुआ गुजरात मॉडल, बिहार लोक सेवा आयोग ने 70वीं में मुख्य परीक्षा से एक ऐतिहासिक फैसला लिया है।
पहली बार BPSC इंटरव्यू परीक्षा में ‘गुजरात मॉडल’ लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य इंटरव्यू प्रक्रिया को और और भी ज्यादा निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है। कई बार बिहार लोक सेवा आयोग के ऊपर आरोप लगते थे कि इंटरव्यू पक्षपात होता है और अपने पहचान के आधार पर अभ्यर्थियों के नंबर दिए जाते थे। इन्ही ही प्रश्नों को दूर करने के लिए आयोग ने यह अहम फैसला लिया है।
क्या है गुजरात मॉडल?
“गुजरात मॉडल” मुख्य रूप से लॉटरी सिस्टम पर आधारित एक चयन प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य इंटरव्यू में होने वाले किसी भी प्रकार के पक्षपात या “मैनेजमेंट” को पूरी तरह समाप्त करना है। इंटरव्यू बोर्ड का निर्धारण पहले से नहीं होता है। अभ्यर्थी को अपने बोर्ड की जानकारी इंटरव्यू शुरू होने से कुछ मिनट पहले मिलती है।
अभ्यर्थियों की पहचान गोपनीय रखी जाती है। उन्हें नाम या रोल नंबर के बजाय एक विशिष्ट कोड दिया जाता है। इससे ना तो किसी अधिकारी को पहले से जानकारी होगी और ना ही अभ्यर्थी को किसी बोर्ड को लेकर अनुमान लगा पाएंगे।
इस बदलाव को लेकर जरूर क्यों पड़ी?
BPSC इंटरव्यू को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। बीपीएससी में इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों का आरोप होता है कि बोर्ड द्वारा पक्षपात किया गया है। पहचान के लोग अपने अभ्यर्थी को अधिक नंबर दे रहे है। इंटरव्यू बोर्ड के मेंबर के बारे में जानकारी होने के बाद अभ्यर्थियों द्वारा उन पर अतिरिक्त दबाव होता था।
ऐसे में रिजल्ट प्रकाशित होने के बाद अभ्यर्थी पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन करते थे। इसी हालात को देखते हुए बिहार में गुजरात मॉडल लागू किया गया है। गुजरात में पहले से ही अभ्यर्थी इंटरव्यू बोर्ड का चयन करते है।
अभ्यर्थियों को क्या फायदा होगा?
इस नए नियम के अनुसार सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि
- इंटरव्यू में पक्षपात की संभावना कब होगी
- किसी भी बोर्ड को लेकर डर या उम्मीद नहीं रहेगी
- सभी अभ्यर्थियों का मूल्यांकन एक समान आधार पर होगा
- चयन की प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों के बीच भरोसा बढ़ेगा।
यही वजह है कि विशेषज्ञ इस फैसले को बीएससी के इतिहास का एक बड़ा सुधार मान रहे हैं।
आखिरी बात..
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा गुजरात मॉडल को अपनाना एक ऐतिहासिक कदम है। यह न सिर्फ अभ्यर्थियों का भरोसा लौटने की जरूरत है, बल्कि बिहार की चयन प्रक्रिया को देश में बेहतर करने का प्रयास भी है।

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